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डॉ. शशि शर्मा

September 05, 2020
लौटती सांसे  देखो शोर मत करो  बंदूकों को सुस्ताने दो  और धरती को सोने दो आज मुद्दतों के बाद  चौखटों ने आकाश ताका है  बच्चों ने मैदान के बीचो...Read More

पूरन सिंह

August 23, 2020
पुरूषत्व मैं चाहती हूॅं घर और बाहर तुम्हारी शक्ति बनूं साथ दूं तुम्हारा जीवन के उबड खाबड रास्तों पर। मैं चाहती हूॅं मैं तुम्हारे ओर तुम मेरे...Read More

नीलम शर्मा 'अंशु'

August 22, 2020
1) आई बैसाखी आज फिर आई है बैसाखी दिन भर चलेगा दौर एस एम एस, ईमेल, फेस बुक पर बधाई संदेशों का.... याद हो आती है इतिहास के पन्नों में दर्ज एक ...Read More

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